भोपाल के पीड़ितों के स्वास्थ्य पर शोध करने के लिए बना राष्ट्रीय पर्यावरणीय स्वास्थ्य शोध संस्थान (NIREH) ने पीड़ितों के स्वास्थ्य पर पड़े नुकसान पर वैज्ञानिक अध्ययन क्यों बन्द कर दिए हैं?

प्रेस विज्ञप्ति
13 नवंबर 2021

37 दिन के अभियान के उनीसवे (19) दिन पर भोपाल में यूनियन कार्बाइड गैस हादसे के पीड़ितों ने भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय से जवाब माँगा | उन्होंने पूछा, “2011 में यूनियन कार्बाइड के जहरों से पीड़ितों के स्वास्थ्य पर शोध करने के लिए बना राष्ट्रीय पर्यावरणीय स्वास्थ्य शोध संस्थान (NIREH) ने भोपाल के पीड़ितों के स्वास्थ्य पर पड़े नुकसान पर वैज्ञानिक अध्ययन क्यों बन्द कर दिए हैं ?”

2010 में भोपाल के मंत्री समूह ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के 31वें केंद्र को भोपाल में स्थापित करने के आदेश दिया जिसका मुख्य उद्देश्य पुरानी बीमारियों से ग्रसित गैस पीड़ितों पर शोध करना और प्रदूषित भूजल के पीड़ितों के स्वास्थ्य पर निगरानी करना था | “इस संस्था की स्थापना के 10 साल बाद भी एक भी शोध प्रकाशित नहीं किया जो गैस पीड़ितों की मदद करे,” कहती है भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की रशीदा बी

आज तक भोपाल गैस पीड़ितों के स्वास्थ्य पर एक भी कारगार शोध करना तो दूर बल्कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आई.सी.एम.आर) ने एक ऐसे अध्ययन के नतीजों को दबा दिया जिसमें गैस पीड़ित माताओं के बच्चों में अपीडित माताओं के बच्चों के मुकाबले 7 गुना ज्यादा जन्मजात विकृतियां पाई गई | “इस अध्ययन के नतीजे से उन कंपनियों से अतिरिक्त मुआवजा लेने के लिए दायर सुधार याचिका को पृष्ठ किया जा सकता था, पर उन्हें तो पूरी तरह से दबा दिया गया | यह एक और उदाहरण है कि केंद्र सरकार की  यूनियन कार्बाइड और उसके वर्तमान मालिक डाव केमिकल के साथ सांठगांठ अभी भी जारी है” कहती है भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा की शहजादी बी

सितम्बर 2019 में NIREH की विशेषज्ञों समूह की नौवीं  बैठक में संस्था के मुख्य उद्देश्य-“भोपाल गैस पीड़ितों एवं प्रदूषित भूजल  पीड़ितों पर शोध” को बदलकर पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर केंद्रित करने का फैसला लिया | NIREH देश के विभिन्न हिस्सों में पर्यावरणीय स्वास्थ्य के मुद्दों पर अध्ययन कर रही है,पर भोपाल में यूनियन कार्बाइड के जहरीले रसायनों  की वजह से लोगों के स्वास्थ्य को पहुंची क्षति को पूरी तरह से अनदेखा किया जा रहा है, यह दोहरे मापदंड सिर्फ डाव केमिकल को मदद पहुंचाने के लिए अपनाए जा रहे है”, कहती है भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एन्ड एक्शन की रचना ढिंगरा |

रशीदा बी

भोपाल गैस पीड़ित स्टेशनरी कर्मचारी संघ

9425688215

नवाब खाँ एवं शहजादी बी

भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा

7441193309

रचना ढिंगरा,

भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन,

9826167369

नौशीन खान

डाव-कार्बाइड के खिलाफ बच्चे

 

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