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डाव केमिकल कम्पनी को बचाने के विरोध में हादसे के पीड़ितों ने अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा का पुतला जलाया

प्रेस विज्ञप्ति

13 अगस्त 2016 

अमरीकी सरकार द्वारा यूनियन कार्बाइड गैस हादसे पर भोपाल जिला अदालत में जारी आपराधिक प्रकरण से डाव केमिकल कम्पनी को बचाने के विरोध में आज हादसे के पीड़ितों ने अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा का पुतला जलाया। अमरीकी राष्ट्रपति के दफ्तर के वेबसाइट पर 1 लाख से अधिक हस्ताक्षरकर्ताओं द्वारा जिला अदालत से डाव केमिकल के ख़िलाफ़ जारी नोटिस की अमरीकी न्याय विभाग द्वारा तामीली की माँग के जवाब में दिए गए बयान पर गैस पीड़ितों के संगठनों के नेताओं ने आक्रोश जताया।

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भोपाल के समर्थक भारत में अमरीकी दूतावासों के बाहर प्रदर्शन कर यह माँग करेंगे कि अमरीकी सरकार डाव केमिकल को सरंक्षण देना बंद करे| समर्थक @POTUS और @PMO पर ट्वीट कर 19 अगस्त की पेशी पर डाव केमिकल को हाज़िर करवाने का सन्देश भी भेजेंगे |

अमरीकी राष्ट्रपति के दफ्तर से जारी बयान के अनुसार कि अगर वह अमरीकी न्याय विभाग को डाव केमिकल पर नोटिस तामिल करवाने के लिए कहती है तो यह “अनुचित दबाव” डालना  होगा| ये तो सरासर फ़रेब है |  न्याय विभाग को भारत और अमरीका के बीच की संधि की शर्तों का पालन करने को कहना अनुचित कैसे हो सकता है ?”, कहते हैं भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के बालकृष्ण नामदेव।

भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा के नवाब ख़ाँ कहते हैं “अमरीकी सरकार द्वारा भारत के साथ संधि की शर्तों का उल्लंघन अनुचित दवाब के बहाने से करना वाकई दिलचस्प है क्योंकि भोपाल में अमरीकी सरकार आज तक यही करती आई है। इस बात के दस्तावेज़ी सबूत है कि अमरीकी सरकार ने भोपाल में यूनियन कार्बाइड के कारख़ाने को लगाने में और भोपाल अदालत में जारी कानूनी कार्यवाही से कंपनी के अध्यक्ष वॉरेन एण्डरसन को बचाने में अनुचित दवाब का इस्तेमाल किया है।”

“अमरीकी  न्याय विभाग द्वारा भोपाल अदालत से जारी 4 नोटिसों पर अमरीका और भारत के बीच 25 साल पुरानी पारस्परिक कानूनी सहायता संधि के लगातार उल्लंघन पर भारत सरकार और ख़ासकर केंद्रीय गृह मंत्रालय की चुप्पी पर हम हैरान हैं। , कहती हैं भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एण्ड एक्शन की रचना ढींगरा। उन्होंने  बताया कि संगठनों ने प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय को चिट्ठी लिख कर यह माँग की है कि भारत सरकार पारस्परिक कानूनी सहायता संधि के तहत अमरीकी सरकार के किसी भी अनुरोध का सम्मान न करे जब तक भोपाल जिला अदालत द्वारा जारी नोटिस अमरीकी न्याय विभाग डाव केमिकल को तामील नहीं कराती है।

डाव – कार्बाइड के खिलाफ बच्चों की साफ़रीन ख़ान कहती हैं, “राष्ट्रपति ओबामा ने मैक्सिको की खाड़ी में तेल रिसाव हादसे के लिए एक ब्रिटिश कम्पनी के चूतड़ पर लात मारने की कसम खाई थी पर जब यही बात अमरीकी कंपनी के लिए आती है तो उसे वह चूमते नजर आते हैं।”

बालकृष्ण नामदेव

भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा, 9826345423

नवाब खाँ

भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा

8718035409

रचना ढींगरा, सतीनाथ षडंगी

भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन,

9826167369

साफरीन ख़ान

डाव-कार्बाइड के खिलाफ बच्चे

Read the press release in English

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यूनियन कार्बाइड गैस हादसे की 31 वीं बरसी के पूर्वसंध्या में पीड़ितों के पाँच संगठनों ने मिलकर अपराधी कंपनियों को सज़ा और पीड़ितों को अतिरिक्त मुआवजे लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया

प्रेस विज्ञप्ति

दिसम्बर 02, 2015

भोपाल में यूनियन कार्बाइड गैस हादसे की 31 वीं बरसी के पूर्वसंध्या में पीड़ितों के पाँच संगठनों  ने आज एक मशाल जूलूस निकाली |   जूलूस का समापन परित्यक्त यूनियन कार्बाइड कारखाने के सामने भोपाल माता की मूर्ती पर हुआ जहाँ संगठनों के सदस्यों ने गैस्काण्ड के मृतकों को श्रद्धांजली दी |  संगठनो के सदस्यों ने मिलकर अपराधी कंपनियों को सज़ा और पीड़ितों  को अतिरिक्त मुआवजे  लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया ।

संगठनों ने कहा की भारत सरकार ने 3 दिसंबर 2010 को युनियन कार्बाइड और उसके मालिक डाव केमिकल से 1.2 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त मुआवजा लेने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में सुधार याचिका दायर की थी । उनके अनुसार पिछले 5 सालों में इस याचिका पर मात्र एक बार सुनवाई हुई है और भारत सरकार द्वारा त्वरित सुनवाई के लिए आज तक एक भी आवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया है ।

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संगठनों का आरोप है की भारत सरकार ने सुधार याचिका में यूनियन कार्बाइड द्वारा पहुँचाए गए नुकसान को कम करके बताया है और अतिरिक्त मुआवजे के तौर पर बहुत छोटी राशि की मांग की है । “1985 में भारत सरकार ने मुआवजा बतौर 3.3 बिलियन डॉलर की मांग की थी जो आज के दर से 7 बिलियन डॉलर होगा । यूनियन कार्बाइड ने आज तक मुआवजे में सिर्फ 470 मिलियन डॉलर दिया है । सरकार को सुधार याचिका के तहत कम से कम 6.5 बिलियन डॉलर माँगने चाहिए और जो माँगा जा रहा है वो उसके पांचवे हिस्से से भी कम है,” कहती है भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की रशीदा बी ।

भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने कहा, “केंद्र और प्रदेश की सरकारे हादसे के वजह से हुई मौतों और बीमारियों के झूठे आंकड़ों के आधार पर अतिरिक्त मुआवजे में बहुत कम धनराशि की मांग कर रहे है । सरकार कहती है की हादसे में सिर्फ 5295 लोग मारे गए जबकि सरकारी शोध संस्था के रिकार्ड बताते है की गैस काण्ड के  बाद के 9 सालों में 10,000 से ज्यादा लोग मारे गए है ।”

भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा के नवाब खां ने बताया की मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रकाशित आंकड़े यह बताते है की सन 2010 में गैस पीड़ितों के अस्पतालों में इलाज लेने वालों में से 431495 पुराने रोगी थे । “अस्पतालों के अलावा इलाज के लिए दूसरी जगह जाने वाले पीड़ितों की अगर गिनती की जाए तो यह निश्चित तौर पर कहा जा सकता है की 1984 में गैस से प्रभावित लोगों में से 90% को आज भी अस्पतालों में इलाज लेना पड़ रहा है । इसके विपरीत केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दायर सुधार याचिकाओं में यह कहा गया है की ९३% पीड़ित सिर्फ एक दिन के लिए अस्पताल गए है “, उन्होंने कहा  |

भोपाल ग्रुप फॉर इनफार्मेशन एंड एक्शन के सतीनाथ षडंगी के मुताबिक़ भारत सरकार के साथ दो अमरीकी कंपनियों -यूनियन कार्बाइड और  वर्तमान मािलक डाव केमिकल कंपनी की सांठगांठ जारी रहने के वजह से ही गैस पीड़ितों को  इन्साफ नहीं मिल पा रहा है ।

“आज के दौर में अमरीकी कंपनियों और भारत सरकार की नापाक सांठगांठ और भी मजबूत हो गई है । मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भोपाल के कातिलों के खिलाफ इन्साफ हासिल करना और भी मुशिकल हो गया है,” कहती है डाव कार्बाइड के खिलाफ बच्चों की साफरीन खां ।

 

रशीदा बी

भोपाल गैस पीड़ित स्टेशनरी कर्मचारी संघ

9425688215

बालकृष्ण नामदेव

भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा, 9826345423

नवाब खाँ

भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा

8718035409

रचना ढींगरा, सतीनाथ षडंगी

भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन, 9826167369

साफरीन ख़ान

डाव-कार्बाइड के खिलाफ बच्चे

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भोपाल हादसे के लम्बित मसलों को सुलझाने में मोदी सरकार विफल – पीड़ितों के हकों के लिए लड़ने वाले संगठन

प्रेस विज्ञप्ति

नवम्बर 30, 2015

भोपाल में यूनियन कार्बाइड हादसे की 31 वीं बरसी पर आयोजित पत्रकार वार्ता में पीड़ितों के हकों के लिए मिलकर लड़ने वाले पाँच संगठनों के नेताओं ने आज हादसे के लम्बित मसलों को सुलझाने में मोदी सरकार की विफलता की तीव्र भर्त्सना की | उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा पर्यावरण और श्रम कानूनों में जो बदलाव प्रस्तावित हैं उनसे देश भर में भोपाल जैसे हादसे की आशंका बढ़ जाएगी |

भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्षा श्रीमती रशीदा बी ने कहा, “भारतीय अदालतों की अवहेलना करने वाली अमरीकी कम्पनियों के खिलाफ कार्रवाई में केंद्रीय सरकार पूरी तरह से विफल रही है । भोपाल के मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी ने डाव केमिकल को हाज़िर होने के लिए पिछले एक साल में तीन बार नोटिस भेजे हैं पर भारत सरकार इस कम्पनी को अदालत  में हाज़िर नहीं करा पाई है।” वह कहती हैं |

संगठनों ने कहा कि मोदी के कार्यकाल में सी. बी. आई. ने जानबूझकर डाव केमिकल की भारतीय शाखा द्वारा रिश्वत देने के मामले से कम्पनी को बच निकल जाने दिया |  “सी. बी. आई. हमेशा इन कम्पनियों के खिलाफ कार्रवाई में ढील बरतती आई है लेकिन मोदी जी के अधीन यह ब्यूरो जितनी ढीली हुई है इसने तीस सालों के ढिलाई का रिकॉर्ड तोड़ दिया है |” कहते हैं भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष श्री बालकृष्ण नामदेव|

भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा के श्री नवाब ख़ान ने भोपाल के परित्यक्त यूनियन कार्बाइड कारखाने के आसपास जारी ज़हरीले प्रदूषण के वैज्ञानिक आंकलन करने की संयुक्त राष्ट्रसंघ की पर्यावरण संस्था यूनेप के प्रस्ताव का लाभ उठाने में मोदी सरकार की  विफलता पर नाराज़गी जाहिर की | “इस इलाके की ज़हर सफाई के लिए सबसे पहले जमीन के नीचे के प्रदूषण का वैज्ञानिक आंकलन होना ज़रूरी है पर पर्यावरण मन्त्री ने बगैर कारण बताए यूनेप के इस अभूतपूर्व प्रस्ताव को ठुकरा दिया।” उन्होंने कहा|

प्रधान मन्त्री पूरे देश को साफ़ सुथरा बनाने की बात करते हैं पर भोपाल के कारखाने के अंदर और आसपास जमीन के नीचे दबे हज़ारों टन ज़हरीली कचरे की उनके स्वच्छता अभियान में कोई जगह नहीं है |” कहती हैं डाव कार्बाइड के ख़िलाफ़ बच्चे की साफरीन ख़ान|

संगठनों ने मोदी सरकार द्वारा कानूनों में प्रस्तावित उन बदलावों के बारे में आशंका व्यक्त किया जिनसे भोपाल जैसे हादसे और बढ़ेंगे। ‘वर्तमान सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक़ पर्यावरण और श्रम के मामलों में कंपनियों  को यह अधिकार होगा कि वे अपने को सही होने का प्रमाण पत्र खुद ही  जारी कर सकें| इससे तो उन्हें देश भर में भोपाल जैसे हादसे घटाने के लिए प्रोत्साहन ही मिलेगा।” कहते हैं भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एण्ड एक्शन के सतीनाथ षडंगी|

 

रशीदा बी

भोपाल गैस पीड़ित स्टेशनरी कर्मचारी संघ

9425688215

बालकृष्ण नामदेव

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नवाब खाँ

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रचना ढींगरा, सतीनाथ षडंगी

भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन, 9826167369

साफरीन ख़ान

डाव-कार्बाइड के खिलाफ बच्चे

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यूनियन कार्बाइड के परित्यक्त कारखाने के आस-पास रहवासियों ने प्रदर्शन कर मुफ्त इलाज, साफ़ पानी की आपूर्ति और पानी के बिल माफ़ करने की माँग की

प्रेस विज्ञप्ति

दिनांक 26 नवम्बर 2015

भोपाल में यूनियन कार्बाइड के परित्यक्त कारखाने के आस-पास के मोहल्लों के सैकड़ों रहवासियों ने आज जवाहरलाल नेहरू अस्पताल पर प्रदर्शन कर मुफ्त इलाज, साफ़ पानी की आपूर्ति और पानी के बिल माफ़ करने की माँग की | यूनियन कार्बाइड पानी पीड़ित संघर्ष मोर्चा की तरफ से प्रदर्शनकारियों ने प्रदेश सरकार के भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री को ज्ञापन सौंपा ।

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प्रदर्शनकारियों ने बताया कि लखनऊ की भारतीय विष विज्ञान शोध संस्थान के 2013 की रिपोर्ट के मुताबिक़ 22 मोहल्लों का भूजल कीटनाशक कारखाने के ज़हरीले कचरे की वजह से प्रदूषित हो चुका है| उनके अनुसार पिछले बीस से भी अधिक सालों से वे ऐसा पानी पीते आ रहे हैं जिसमें गुर्दे, लीवर, फेफड़े और मस्तिष्क को नुकसान पहुँचाने  वाले रसायन और भारी धातु हैं जिनसे  कैंसर तथा जन्मजात विकृतियाँ होती हैं।

शिव नगर की गृहणी श्रीमती सुनीता ने कहा की जहाँ 1984 में यूनियन कार्बाइड की ज़हरीली गैसों से प्रभावित लोगों को मुफ्त इलाज दे रही है वही उसी कंपनी द्वारा प्रदूषित भूजल से पीड़ित  10,000 परिवारों को मुफ्त इलाज नहीं देने का कोई औचित्य नहीं है।

प्रदेश सरकार की संस्था पुनर्वास अध्ययन केंद्र की 2009 रिपोर्ट के हवाले से नवाब कॉलोनी के रहवासी श्री इकबाल खाँ बताते हैं कि इस वैज्ञानिक शोध से यह नतीजा निकला था कि प्रदूषित भूजल वाली आबादी में अप्रभावित आबादी की अपेक्षा श्वसन एवं पाचन तंत्र के साथ-साथ चमड़ी और आँखों की बीमारियाँ ज़्यादा हैं।

मुफ्त इलाज के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों ने जन्मजात विकलांगता वाले बच्चों की पुनर्वास सुविधाओं की भी माँग की । “माता पिता के ज़हरीले पानी पीने की वजह से हमारे मोहल्ले में हर पाँचवे घर में एक बच्चा शारीरिक और मानसिक अपंगता के साथ पैदा होता है ।” सरकार को चाहिए कि इनके पुनर्वास के लिए विशेष व्यवस्था करे, कहती हैं ब्लूमून कॉलोनी की शहजादी बी।

शिव शक्ति नगर की उषा डोंगरे ने नगर-निगम द्वारा पानी के बिल के तौर पर अत्यधिक पैसे की माँग करने की शिकायत की। दूसरे प्रदर्शनकारियों के साथ वह निःशुल्क पानी पहुँचाने की माँग कर रही हैं। “हमने 20 सालों तक सरकारी हैंडपम्प का ज़हरीला पानी पिया है, अब इस ज़हर को हमारे शरीर से निकालने के लिए सरकार को  चाहिए कि हमें कम-से-कम 20 सालों तक मुफ्त साफ़ पानी पिलाए।

सर्वोच्च न्यायालय के मई 2004 के आदेश के फलस्वरूप अगस्त 2014 में प्रदेश सरकार द्वारा 10 ,000 परिवारों को पीने के पानी के निःशुल्क कनेक्शन दिए गए। आज  कई रहवासी पानी गंदा, अपर्याप्त मात्रा में होने और समय पर न आने की शिकायत करते हैं। उड़िया बस्ती के श्री गंगाराम के अनुसार आज पाईप द्वारा पानी आपूर्ति की समस्याओं की वजह से कई हज़ार रहवासी ज़हरीला पानी पीने को मजबूर हैं।

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श्रीमती सुनीता-शिव  नगर, श्रीमती उषा ढ़ोंगरे-शिव शक्ति नगर, श्री इकबाल खाँ-नवाब कॉलोनी, श्रीमती शहज़ादी बी-ब्लू मून कॉलोनी, श्री गंगाराम-उड़िया बस्ती

यूनियन कार्बाइड पानी पीड़ित संघर्ष मोर्चा

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भोपाल गैस पीड़ित संगठन गैस हादसे की वजह से हुई मौतों और शारीरिक क्षति के सही आंकड़ों के लिए भारत सरकार के विरुद्ध दिल्ली उच्च न्यायालय जाएगें

प्रेस विज्ञप्ति

नवम्बर 14, 2015

भोपाल गैस काण्ड के पीड़ितो के हको के लिए लड़नेवाले पाँच संगठनो के नेताओं ने आज एक पत्रकार वार्ता में यूनियन कार्बाइड और डाव केमिकल से अतिरिक्त मुआवज़ा लेने के मामले में केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा जानबूझ कर की जा रही देरी की निंदा की।

आज से ठीक एक साल पहले छः महिलाओं के चार दिनों के निर्जला अनशन के बाद संगठनो ने गैसकांड की वजह से हुए मौतो और शारीरिक क्षति के आँकडो पर पुनर्विचार की लड़ाई जीती थी| रसायन एवं खाद मंत्री द्वारा सम्बंधित विभागो से हादसे की वजह से हुई मौतो और शारीरिक क्षति के सही आँकड़े माँगने की सहमति पर ही महिलाओं ने अपना अनशन तोडा  था ।

संगंठनो से हुई बातचीत के मुताबिक़ हादसे की वजह से हुई शारीरिक क्षति के आँकड़े प्रदेश सरकार द्वारा अस्पतालो  के रिकॉर्डों से जुटाए जाने थे। साथ ही भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आई.सी.एम.आर.) को भोपाल पीड़ितों पर किए गए शोध अध्ययनो के आधार पर हादसे की वजह से हुई मौतोँ पर वैज्ञानिक आँकड़े उपलब्ध कराने थे। इस  बात पर सहमति हुई थी कि केंद्र और राज्य संस्थाओं द्वारा आँकड़े उपलब्ध कराने के बाद रसायन एवं खाद मंत्रालय अमरीकी कम्पनियोँ से अतिरिक्त मुआवज़े के लिए दायर सुधार के आँकड़ो पर पुनर्विचार करेंगी।

भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्षा रशीदा बी ने कहा “रसायन एवं खाद मंत्रालय की चिट्ठी का जवाब देने में ही प्रदेश सरकार ने 6 महीने लगा दिए।[1][2][3] अब साल होने को है और अब तक प्रदेश सरकार गैस हादसे के बाद अस्पतालों में इलाज लेने वाले गैस पीड़ितों की संख्या नहीं बता पाई है।”

भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने बताया कि उनके द्वारा जानकारी के अधिकार के तहत उपलब्ध दस्तावेज़ यह बताते हैं कि रसायन एवं खाद्य मंत्रालय द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देने से बचने की पैंतरेबाजी में जुटे हैं।[4][5][6]

भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा के नवाब खां के अनुसार 80,000 पीड़ितो पर 10 साल के अध्ययन के बाद गैस काण्ड की वजह से हुई मौतोँ के वैज्ञानिक आँकड़े जुटाने में असफल होकर डा. पदम सिंह की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति अपनी संस्था और महामारी विज्ञान दोनो को बदनाम कर रही है।

भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन के सतीनाथ षडंगी ने बताया कि सभी संगठन जल्द ही आई.सी.एम.आर. के विशेषज्ञों की वजह से भोपाल गैस पीड़ितो के न्याय पाने के संवैधानिक अधिकार के हनन के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय जायेंगे।

डाव-कार्बाइड के खिलाफ बच्चे की साफरीन ख़ान ने कहा “यह देश के लिए शर्म की बात है कि भोपाल में यूनियन कार्बाइड हादसे के सरलतम वैज्ञानिक सवाल आज तक अनुत्तरित हैं और यह हमें कतई मंज़ूर नहीं कि सरकारी वैज्ञानिकों के निकम्मेपन की वजह से भोपाल पीड़ितों को उनके हक़ का मुआवज़ा न मिले।“

रशीदा बी

भोपाल गैस पीड़ित स्टेशनरी कर्मचारी संघ

9425688215

बालकृष्ण नामदेव

भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा, 9826345423

नवाब खाँ

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रचना ढींगरा, सतीनाथ षडंगी

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साफरीन ख़ान

डाव-कार्बाइड के खिलाफ बच्चे

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