भोपाल गैस पीड़ितों ने यूनियन कार्बाइड से जहरीले कचरे को गुपचुप स्थानांतरित एवं निष्पादन और पीथमपुर के निवासियों के जीवन और स्वास्थ्य को खतरे में डालने के लिए मंत्रियों से स्पष्ट जवाब मांगें

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प्रेस विज्ञप्ति                           अगस्त 17 2015

भोपाल में 1984 के यूनियन कार्बाइड हादसे के पीड़ितों के हक़ की लड़ाई लड़ने वाले पांच संगठनों के नेताओ ने आज एक पत्रकार वार्ता में यूनियन कार्बाइड कारखाने से ज़हरीले कचरे को  गुपचुप स्थानांतरित एवं निष्पादन के बारे में सम्बंधित मंत्रियों से स्पष्ट जवाब की मांग की ।

संगठनों ने मध्य प्रदेश सरकार के भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग पर ज़हरीले कचरे के निष्पादन के सम्बन्ध में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना करने और पीथमपुर के निवासियों के जीवन और स्वास्थ्य को खतरे में डालने का आरोप लगाया ।

संगठनों ने इस बात पर खेद जताया कि  केंद्र तथा राज्य की सरकारें परित्यक्त कारखाने के पास प्रदूषित इलाके के वैज्ञानिक आकलन के जरूरी काम को छोड़ बेमतलब के कामों से भोपाल जैसे अन्य हादसे की स्थिति बना रही है ।

भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्षा रशीदा बी ने कहा, “सितम्बर 2010 तत्कालीन पर्यावरण मंत्री ने पीथमपुर में कार्बाइड के कचरे को जलाने का विरोध इस आधार पर किया था कि इससे यशवंत सागर का पानी प्रदूषित होगा जो सारा इंदौर पीता है । हम उनसे पूछना चाहते हैं  कि इंदौर वालों  के पानी को  प्रदूषण से बचाने के लिए वह  क्या कर रहे हैं ” 

भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्च के अध्यक्ष  बालकृष्ण नामदेव ने तत्कालीन गैस राहत मंत्री श्री बाबूलाल गौर से यह जानने की मांग की कि उन्होंने पीथमपुर संयंत्र के क्षमता के संबंध में जो गंभीर आशंकाऍ  व्यक्त की थीं, उनका समाधान कैसे हुआ ? अक्टूबर 2012 में मंत्रियों के समूह की बैठक में श्री गौर ने पीथमपुर में भोपाल के कचरे का प्रायोगिक निष्पादन का विरोध इस आधार पर किया था कि यह देश के सबसे घटिया संयंत्रों में से एक है

भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा के नवाब खां ने भी यह जानना चाहा कि पीथमपुर के निवासियों और पड़ोस के कारखाने के मजदूरों को चेताने और बचाव करने के लिए गैस राहत विभाग द्वारा कौनसे कदम उठाए गए ।  इन्हीं लोगों के बारे में इसी विभाग ने सर्वोच्च न्यायालय में 2013 में अपने हलफनामे में यह आशंका जताई थी कि उन्हें इस कचरे के निष्पादन से नुकसान पहुँच सकता है ।

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भोपाल ग्रुप फॉर इनफार्मेशन एंड एक्शन की रचना ढिंगरा ने आशंका जताई कि वर्तमान में जारी निष्पादन के काम में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की जा रही है । उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि अब तक तो काम हुआ है और जो हो रहा है उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग रखी जा रही है । उन्होंने इस बात पर ख़ास चिंता जाहिर की कि डायोक्सीन और फ्यूरन जैसे खतरनाक रसायनों  पर निगरानी रखने वाले केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के विशेषज्ञ मौके पर ही मौजूद नहीं है । उन्होंने बताया कि इससे पहले प्रोयोगिक परिक्षण में 7 में से 6 बार पीथमपुर के लोगों को खतरनाक मात्रा में डायोक्सीन लगी थी ।

डाव – कार्बाइड के खिलाफ बच्चे की साफरीन खां ने कहा कि भोपाल का  कचरा पीथमपुर में जलने से भोपालियों का यूनियन कार्बाइड के जहरों से बचाव नहीं हो रहा क्योंकि यह ज़हर तो मिट्टी और भूजल में शामिल है ।  उन्होंने इलाके के गुणात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत किए जिससे पता चलता है कि 2012 में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च द्वारा चिन्हित 22 बस्तियों से कहीं बड़ा इलाका अब प्रदूषित हो चुका है ।

रशीदा बीभोपाल गैस पीड़ित स्टेशनरी कर्मचारी संध9425688215 बालकृष्ण नामदेवभोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा, 9826345423 नवाब खांभोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा8718035409 रचना ढींगरा, सतीनाथ षडंगीभोपाल ग्रुप फॉर इन्फार्मेशन एंड एक्शन, 9826167369 साफरीन खांडाव-कार्बाइड के खिलाफ बच्चे

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